राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट के बाद उठे कई सवाल, जांच और ट्रस्ट की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट के बाद उठे कई सवाल, जांच और ट्रस्ट की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

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Ram Mandir offering theft case: Several questions raised following the SIT report

अयोध्या। Ram Mandir offering theft case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच भले ही अभी चल रही है। इसकी परिणति क्या होगी़, यह तो नहीं पता, लेकिन सार्वजनिक हुई एसआईटी रिपोर्ट के तथ्यों पर कई ज्वलंत प्रश्न उठ खड़े किए जा रहे हैं। इसका उत्तर दे पाना शायद जांच एजेंसी के साथ श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए भी आसान नहीं होगा।

महत्वपूर्ण सवाल चंपतराय के करीबी रहे आरोपी रामशंकर टिन्नू को लेकर है। रिपोर्ट के एक अंश में उल्लेख है कि बिना स्पष्ट रूप से लिखा-पढ़ी के टिन्नू को हुंडियों की चाभी सौंपी गई थी। उसे इन चाभियों को किसने सौंपा और क्यो, यह उल्लेख नहीं है, बस लोगों के मन में यहीं से सवाल खड़ा हो गया है।

रामलला का दर्शन करने आए मध्य प्रदेश के अभिषेक शर्मा ने ट्रस्ट से सवाल किया कि टिन्नू इतना शक्तिशाली कैसे बना। उसे हुंडियों की चाभी सौंपने वालों का नाम भी सार्वजनिक होना चाहिए। रिपोर्ट में बाकायदा स्पष्ट है कि रामशंकर यादव टिन्नू के पास हुडियों की चाभियां थी, वह भी बिना लिखित आदेश के।

सवाल ये भी है कि क्या टिन्नू स्वयं अत्यंत ताकतवर था या फिर किसी की शक्ति से वह ताकतवर बना। उसने स्वयं की पैरवी से भतीजे मनीष यादव तक की इंट्री चढ़ावे में करवा दी।

उधर गणना की निगरानी में कदम-कदम पर खामियाें का उल्लेख है। इसके लिए सीधे तौर ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र को जिम्मेदार ठहराया है। अनिल मिश्र के बारे में एक और सत्य चर्चा में है, कुछ वर्षों से वह ग्लूकोमा के शिकार हैं, उन्हें आंख से कम दिखता है।

ये सत्य जानते हुए भी कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी सहित सभी ट्रस्टियों ने उन्हें इतना अहम कार्य क्यों दिया, ये भी यक्ष प्रश्न है। उन पर ऑडिटकर्ताओं की सूचना के बाद भी उन्होंने निगरानी व्यवस्था को सख्त नहीं किया। न ही इसे लेकर कोई पत्र लिखा।

बैंक प्रबंधन पर भी निर्धारित गणना नियमों का अनुपालन न कराने का आरोप है। यहां गणना में लापरवाही देखिए, जेब वाले कपड़े, जूता मोजा पहने कर्मचारी भीतर मोबाइल लेकर जाते थे और जलपान भी कक्ष में ही कर लेते थे। अब लोगों को एसआइटी की पूरी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है, जिसमें इसमें दूध का दूध पानी हाेते देख सकें।